KARMCHARI SANGH

KARMCHARI SANGH

NREGA KARMCHARI SANGH UTTAR PRADESH
Mr. Kamlesh Kumar Gupta - Pradesh Prabhari (Gram Rojgar Sevak Sangh U.P.)
Mr. Devendra Pratap Shahi - Pradesh Adhyaksha (Gram Rojgar Sevak Sangh U.P.)
Mr. Bhupesh Kumar Singh - Pradesh Mahamantri (Gram Rojgar Sevak Sangh U.P.)
Mr. Vishnu Pratap Singh - Pradesh Sangthan Mantri (Gram Rojgar Sevak Sangh U.P.)
Mr. Vinay Dwivedi- Pradesh Adhyaksha ( NREGA Karmik Sangh U.P.)
हमारा सन्देश

प्रिय साथियों व मित्रगण
नरेगा उत्तर प्रदेश कर्मचारी संघ आप का हार्दिक स्वागत व अभिनन्दन करता है


हम आप के आभारी है
यु० पी० नरेगा कर्मचारी संघ
हम सब एक है

हम सब एक है

उत्तर प्रदेश मनरेगा कर्मचारी संघ - जिंदाबाद- जिंदाबाद

मनरेगा कार्मिक जागते रहो

जला है पेट हमारा उसकी

जला है पेट हमारा उसकी

सभी भारतवाशी भाइयों, बहनों एवं मनरेगा कर्मचारियों! हमारे दिन-रात के मेहनतों और प्रयासों का यह सिल मिला है कि आज तक हम संविदाकर्मी आज भी मशीनों की तरह दिन-रात संविदा पर कार्य कर रहे हैं जबकि महंगाई दिन दुनी और रात चौगुनी बढ़ती जा रही है. पिछले ७-८ सालों से हमारे मनरेगा कर्मचारियों के लिए आज तक कोई भी एच आर पालिसी नहीं बनीं . हम जीते है या मरते हैं सरकार और शासन को कोई फर्क नहीं पड़ता. दिन रात मशीन की तरह खटने के बाद भी जो मानदेय हमें मिलता है उससे इस महंगाई के युग में हमारा तो गुजरा होता नहीं तो हम अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेंगे एक प्रश्न चिन्ह है. ऊपर से एक-एक दो-दो साल तक हमें मानदेय विहीन जिंदगी काटनी पड़ती है. यह हाल सिर्फ मनरेगा कर्मचारियों का नहीं बल्कि संविदा पर तैनात सभी संविदा कर्मचारियों का है जो आये दिन जिंदगी और मौत से जूझते हुए विभिन्न सेक्टरों में सारकार की विभिन्न योजनाओं को सफल बना रहे हैं. परन्तु अपनी समस्यायों को सरकार से अवगत करने के बावजूद भी हमें असफलता और निराश के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा. अतः हम सभी मनरेगा कर्मचारी अन्य संविदा कर्मचारियों के सहयोग से ११, १२, १३ फरवरी, २०१३ को दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रिय धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं. जहाँ लगभग दो लाख संविदा कर्मचारी नियमितीकरण और एक एच आर पालिसी की मांग को लेकर एक साथ और एक स्वर में अनुनाद करने जा रहे हैं. जिसमे आप सभी का साथ और समर्थन अपेक्षित है
मनरेगा कार्मिक शर्म करो!
२१, २२ फरवरी २०१३ भारत बंद करो!
हम मनरेगा कर्मचारियों के लिए बहुत ही शर्म की बात है कि जब हमारे लगभग ५ हजार मनरेगा साथी ११, १२ और १३ फरवरी २०१३ को जंतर-मंतर नई दिल्ली में तिन दिवसीय धरने पर थे. ठीक उसी समय हमारे बहुत से साथी चाँद पैसों की खातिर अपने कार्यालयों में बैठकर कुर्सियां तोड़ रहे थे. एक तरफ अधिकार और हक़ के लिए हमारे कुछ साथी भूखे-प्यासे जंतर-मंतर पर समय, सरकार और सिचुएशन से जूझ रहे थे, दूसरी तरफ हमारे बहुत से साथी अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए इन ५ हजार मनरेगा कर्मचारियों की मेहनत पर पानी फेरने का काम कर रहे थे. एक तरफ हमारे कुछ साथी मनरेगा कर्मचारियों के हक़ और आधिकार के लिए रणनीति बना रहे थे तो दूसरी तरफ हमारे बहुत से साथी वैलेंटाइन डे मानाने की तैयारी कर रहे थे. एक तरफ कुछ लोग हक़ और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बहुत से लोग अपने घरों में बैठकर अपनी-अपनी बीबियों के चूड़ियाँ गिनने में लगे हैं.
फिर भी भारत के इतिहास में हमारे कुछ मनरेगा साथियों द्वारा ११, १२ और १३ फरवरी २०१३ जंतर-मंतर पर किये गए धरने को युगों-युगों तक याद किया जायेगा और याद किया जायेगा प्रथम प्रयास में मिली इस धरने की सफलता को जिसका परिणाम यह निकला कि केंद्र सारकार बाध्य हुई हमसे २१, २२ फरवरी, २०१३ को वार्तालाप के लिए.
यदि अब भी अपने घरों और कार्यालयों में स्वार्थ और चैन के नशे में चूर हम मनरेगा कर्मचारियों में शर्म बाकी रह गयी है तो अखिल भारतीय मनरेगा कर्मचारी संघ द्वारा २१, २२ फरवरी २०१३ को मनरेगा कार्य ठप करने के आह्वान का समर्थन करते हुए हम सभी पुरे भारतवर्ष के सम्पूर्ण मनरेगा कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों पर मनरेगा कार्यों को इन दो दिनों में बहिष्कृत करते हुए जिले पर धरना प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय मनरेगा संघ द्वारा लिए गए इस निर्णय को सफल बनाये.
अंत में आप सभी मनरेगा कर्मचारी साथियों को ‘दुष्यंत कुमार’ के इन पक्तियों के साथ आह्वान करना चाहूँगा………..
अंत में आप सभी मनरेगा कर्मचारी साथियों को ‘दुष्यंत कुमार’ के इन पक्तियों के साथ आह्वान करना चाहूँगा………..
तुम्हारे पावों के निचे कोई ज़मीं नहीं,
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीं नहीं.
मैं बेपनाह अँधेरा को सुबह कैसे कहूँ,
मैं इन नज़रों का अँधा तमाशबीन नहीं.
तुझे कसम है खुदी को बहुत हलाक न कर,
तू इस मशीन का पुर्जा है, तू मशीन नहीं.
16.02.13 13:14
upmnrega

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दोस्तों!
क्या आप ने मछली को तैरते हुए देखा है ?
शायद आप का जवाब हो, हाँ
पर हम यहाँ आप को अस्वस्त कर देना चाहते है की आप नदी,तालाब ,पोखरे
या अन्य किसी स्थल पर तैरते हुए मछली को देखे होंगे जो पूरी तरह स्वस्थ
और स्वतंत्र होती है,पर हमारी स्थिति इसके विपरीत चुल्लू भर पानी में तड़पने
वाली मछली के सामान है और ऊपर से यह चिलचिलाती धुप और चुल्लू भर
पानी को भी सुखाता ( अवशोषित करता ) हुआ सूर्य !
हम बात कर रहे है अपनी जिसे समुन्द्र नदी और तालाब तो नहीं मिला है
किन्तु भूख और पेट तो हमारे भी उन्ही मछलियों के सामान है, सच कहे तो आज
इस स्थिति में है की हमें विगत दिनों/महीनो से चुल्लू भर पानी भी नहीं मिल रहा है ,

" पर अब हम एक है और पुर्णतः संगठित है और हम इसी तरह मिल कर कार्य करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब नदी में तैरेंगे ही नहीं बल्कि समुन्द्र भी प्राप्त कर सकते है !"



MNREGA Karmchari sangh
Uttar Pradesh ( India )
 चल रहे कार्य :

चल रहे कार्य :

विभिन्न स्थलों पर चल रहे कार्यो की एक झलक
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